प्रेगनेंट होने के लक्षण क्या हैं? – Pregnancy Symptoms

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प्रेगनेंट होने के लक्षण

गर्भधारण करते ही महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव आने शुरू हो जाते हैं. शुरूआती लक्षणों को पहचानकर आप भी यह जान सकते हैं कि आप प्रेगनेंट हैं या नहीं. आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि प्रेगनेंट होने के लक्षण क्या हैं?

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प्रेगनेंसी के लक्षण कितने दिन में दिखते हैं?

प्रेगनेंसी का एहसास होना हर महिला के लिए सबसे ख़ास पल होता है. आजकल बाज़ार में प्रेगनेंसी की जांच करने के लिए कई तरह के उपकरण और दवाइयां उपलब्ध हैं लेकिन ये दवाएं प्रेगनेंट होने के अगले महीने से ही काम करती हैं. प्रेगनेंसी कंसीव करने के 6 से 14 दिन बाद प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

प्रेगनेंसी का पता कैसे चलता है? – Pregnancy ka pata kaise chalta hai?

प्रेगनेंट महिला को प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों को पहचानना बहुत ही ज़रूरी है और ये लक्षण पहचानने के लिए आपको अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना और उन्हें महसूस करना आवश्यक है.

प्रेगनेंसी के शुरूआती चरण में कई महिलाओं को प्रेगनेंट होने की जानकारी ही नहीं होती है. आइए जानते हैं कि प्रेगनेंट होने के लक्षण क्या हैं?

पीरियड्स रुक जाना

प्रेगनेंसी का पहला और सबसे अहम् लक्षण है आपके पीरियड्स रुक जाना यानि समय पर पीरियड्स या महावारी न आना. यदि आमतौर पर आपकी महावारी नियमित रहती है और इस बार यह समय पर आने से चूक गई है तो यह आपके प्रेगनेंट होने का संकेत हो सकता है.

आमतौर पर गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में पीरियड्स रुक जाते हैं. अतः आपको समय पर प्रेगनेंसी टेस्ट करा लेना चाहिए.

उल्टी व मितली आना

प्रेगनेंसी कंसीव करते ही कुछ महिलाओं में उल्टी और मितली आना गर्भ धारण करने का शुरूआती लक्षण हो सकता है. ऐसा एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन की अधिकता के कारण होता है.

सुबह-सुबह उठते ही आपको थोड़ी कमज़ोरी सी महसूस होती है और कुछ भी खाने पर उल्टी जैसा महसूस होने लगता है. उल्टी और मितली की समस्या आपको दिन में किसी भी वक़्त या कितनी भी बार हो सकती है.

ब्लीडिंग और ऐंठन

गर्भधारण करते ही गर्भवती महिला को हल्की ब्लीडिंग और शरीर में ऐंठन महसूस हो सकती है. महिला को पीरियड्स न होकर हल्की स्पॉटिंग या क्रैम्पस आते हैं. गर्भधारण करने के एक हफ़्ते बाद गर्भवती महिला के शरीर में ये दोनों लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

ये प्रेगनेंट होने के लक्षण हो सकते हैं. लेकिन यह भी ज़रूरी नहीं है कि यह लक्षण हर गर्भवती महिला में दिखाई दे.

स्तनों में परिवर्तन होना

यह प्रेगनेंट होने का सामान्य लक्षण है. जैसे ही आप गर्भधारण करती हैं आपके हार्मोन्स चेंज होने लगते हैं. गर्भधारण करने के एक माह बाद स्तनों का आकार बढ़ने लगता है. स्तनों में भावी बच्चे के लिए दुग्ध ग्रंथियां बढ़ने लगती हैं और स्तनों में रक्त संचार भी बढ़ने लगता है.

इससे आपकी ब्रेस्ट में सूजन आ जाती है या भारीपन भी महसूस होता है और कभी-कभी हल्का दर्द भी होता है. साथ ही, आपकी ब्रेस्ट कड़क हो जाती है और निप्पल का रंग पहले से अधिक गहरा हो जाता है. यह सभी आपके प्रेगनेंट होने के लक्षण हो सकते हैं.

बार-बार टॉयलेट जाना

प्रेगनेंसी के समय आपकी किडनियां पहले की अपेक्षा ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं अतः, आपको बार-बार टॉयलेट जाना पड़ सकता है. यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो हो सकता है कि आप प्रेगनेंट हों.

प्रेगनेंसी के छठें महीने से आप सामान्य से अधिक बार टॉयलेट जाने लगती हैं.

मूड़ स्विंग होना या मनोदशा पर प्रभाव पड़ना

मूड़ स्विंग होना प्रेगनेंट होने का अहम् लक्षण माना जाता है. प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन की मात्रा अधिक हो जाने की वजह से आपके शरीर में हार्मोन्स स्तर बहुत तेजी से बढ़ता है जो कि आपकी मनोदशा को प्रभावित करने के लिए ज़िम्मेदार होता है.

इस दौरान गर्भवती महिला का लगातार बदलता रहता है. कभी आपको कोई चीज़ बहुत अच्छी लगती है तो कभी वही चीज़ आपको बुरी लगने लगती है. कभी आप किसी बात पर बहुत ख़ुश होती हैं तो कभी चिढ़ जाती है या बेवजह ही रोने लगती हैं.

आप अपने भीतर एक ही समय में अच्छी व बुरी दोनों भावनाओं का उफ़ान महसूस कर सकती हैं. इस तरह प्रेगनेंसी की शुरुआत में आपका मूड़ बार-बार बदलता रहता है.

बार-बार भूख लगना और खाने के टेस्ट में बदलाव आना

किसी विशेष भोजन की इच्छा करना या किसी भोजन के प्रति टेस्ट हट जाना आपकी गर्भावस्था का एक लक्षण हो सकता है. इस दौरान आपकी सूंघने की अनुभूति में भी बदलाव आ सकता है. गर्भावस्था के हार्मोन आपके पसंदीदा भोजन के लालच को बढ़ा देते हैं.

भोजन या भोजन पकाने की महक के प्रति आप पहले से अधिक संवेदनशील हो सकती हैं. कुछ विशेष गंध से आपका जी मचला सकता है या फिर यह आपकी भूख को कम भी कर सकता है. कभी-कभी तो महिलाएं कुछ विशेष गंध जैसे-अंडे की गंध, पेट्रोल या डीजल की गंध आदि को बर्दाश्त ही नहीं कर पाती हैं.    

थकान महसूस होना

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में आपका शरीर गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए ख़ुद को तैयार कर रहा होता है. अतः इस दौरान आपको बार-बार थकान महसूस होती है और आप बैठना या लेटना ज्यादा पसंद करती हैं.

ऐसा प्रेगनेंसी के हार्मोन के कारण होता है. अक्सर गर्भावस्था के पहली और तीसरी तिमाही में आपको थकान सबसे अधिक लगती है और नींद भी बहुत आती है.

कब्ज व गैस की समस्या

प्रेगनेंसी के समय अक्सर महिलाओं में गैस व कब्ज की समस्या उत्पन्न हो जाती है. यदि आपको भी अचानक यह समस्या हो गई है तो यह आपके प्रेगनेंट होने का लक्षण हो सकता है.

चक्कर आना

कभी-कभी प्रेगनेंसी की वजह से महिला का ब्लड प्रेशर लो हो जाता है और इस कारण महिला को चक्कर आने की शिकायत रहती है. यदि आपको भी ये लक्षण दिखाई दें तो आपको अपना प्रेगनेंसी टेस्ट करा लेना चाहिए.

प्रेगनेंट होने से जुड़े सवाल-जवाब

  1. गर्भाधान के कितने दिन बाद गर्भावस्था के शुरूआती लक्षण सामने आते हैं?

     गर्भाधान के 6 से 14 दिन बाद गर्भावस्था के शुरूआती लक्षण सामने आते हैं.

  2. गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में कौन से हार्मोन्स का निर्माण होता है?

    गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन्स का निर्माण होता है.

  3. प्रेगनेंसी कब से मानी जाती है?

    औसत गर्भावस्था कुल 40 हफ़्तों यानि 280 दिनों की मानी जाती है जिसकी शुरुआत आपके लास्ट पीरियड के पहले दिन से होती है. प्रायः संक्षेप में इसे ”LMP” कहा जाता है.

  4. ड्यू डेट की गणना कैसे की जाती है?

    डॉक्टर आपके आखिरी पीरियड्स के पहले दिन से 280 दिन तक की गणना करके आपकी ड्यू डेट तय करते हैं. यह पूरी अवधि 40 हफ़्तों की होती है. आपकी ड्यू डेट केवल एक अनुमान मात्र होती है.

  5. पीरियड के कितने दिन बाद बच्चा ठहरता है?

    आपके पीरियड की अवधि समाप्त होने के बाद आप गर्भवती हो सकती हैं. पीरियड के 6 दिन पहले और 4 दिन बाद की अवधि को गर्भधारण की सबसे आदर्श अवधि माना जाता है.

  6. गर्भ ठहरने के कितने दिन बाद उल्टी होती है?

    कुछ महिलाओं को गर्भ ठहरने के एक से दो महीने बाद उल्टियां होनी शुरू होती हैं तो कुछ महिलाओं में गर्भधारण करने के 10 से 15 दिन बाद से उल्टी की समस्या शुरू जोती है. महिला के शरीर में हार्मोनिक बदलाव के कारण उल्टी की समस्या उत्पन्न होती है.

  7. गर्भ धारण करने का सही समय कब होता है?

    गर्भ धारण करने की बेस्ट उम्र 22 से 28 वर्ष मानी जाती है क्योंकि, इस उम्र में महिला शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर गर्भधारण के लिए तैयार होती है.