अच्छे माता पिता कैसे बने? – How to Be a Good Parent

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अच्छे माता पिता कैसे बने? - How to Be a Good Parent?

आज हम बात करेंगे कि अच्छे माता पिता कैसे बने (How to Be a Good Parent). आज के समय में अक्सर हम ये देखते हैं कि पेरेंट्स की अपने बच्चों से काफ़ी शिकायतें रहती हैं और बच्चे भी अपने पेरेंट्स से दूर होते जा रहे हैं | आजकल के बच्चे अपने पेरेंट्स की नहीं सुनते या फिर यूँ कहिये कि पेरेंट्स ही अपने बच्चों को समझ नहीं पाते हैं | आज हम इस टॉपिक के बारे में बात करेंगे कि अच्छा पेरेंट्स बनने के लिए आपको क्या करना चाहिए.

अच्छे पेरेंट्स बनने के लिए क्या करें

बच्चों को समय दें

सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने बच्चों को समय दीजिये | अक्सर हम बच्चों को ये कहते हुए सुनते हैं कि “मेरे पेरेंट्स के पास तो मेरे लिए समय ही नहीं है” | जब बच्चा छोटा होता है और पहली बार स्कूल जाता है तो हर पेरेंट्स बड़े प्यार से उससे पूछते हैं कि आज स्कूल में कैसा लगा, क्या-क्या हुआ लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, हम उससे ये सब पूछने के लिए समय ही नहीं निकाल पाते.

अपने बच्चों को एक अच्छा इंसान बनाने के लिए ये बहुत ही जरूरी है कि चाहे आप कितने भी व्यस्त क्यूँ ना हो अपने बच्चों के लिए समय जरूर निकालिए क्यूँकि जितना ज्यादा समय आप अपने बच्चे को देंगे उतनी ही अच्छी तरह से आप उसे जान पाएंगे और समझ पाएंगे.

दूसरों से तुलना ना करें –

बच्चों को अपनी असफलता से भी सबक लेना सिखाइए | अगर वो अपनी क्लास में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा या जीवन के किसी फील्ड में बैस्ट नहीं दे पा रहा है तो उसे डाँटने या झिड़कने की बजाय प्यार से समझाएं | अपने बच्चों को कभी भी दूसरे बच्चों से COMPARE ना करें और ना ही उनकी हार पर पेरेंट्स को शर्मिंदा होना चाहिए |

प्रत्येक बच्चा अपने में ख़ास होता है और हर बच्चे में कुछ ना कुछ योग्यता जरूर होती है, अतः पेरेंट्स का ये दायित्व है कि वो बच्चे की योग्यता को पहचानकर उसे निखारने में मदत करें.

बच्चों की तुलना दूसरों से करने पर उनके अंदर हीन भावना जन्म ले लेती है, उनका मनोबल टूटने लगता है, खुद पर से विश्वास उठ जाता है और वो सच में ही खुद को दूसरों से कम समझने लगते हैं और इस तरह से उनके अंदर छिपी हुई योग्यता उनके अंदर ही दबकर रह जाती है |

अच्छे माता-पिता का ये कर्तव्य है कि आप अपने बच्चों को ये यकीन दिलाएं कि आप सबसे बेहतर हैं, और आपमें कुछ भी कर गुजरने की काबिलियत है.

बच्चों को डराइये मत

कुछ पेरेंट्स अपनी बात मनवाने के लिए उन्हें डरा देते हैं बिना ये सोचे समझे कि आगे चलकर इसका क्या परिणाम हो सकता है | बच्चों को कभी भी डराइये मत क्यूँकि इसका बच्चों के कोमल मन पर बहुत बुरा असर पड़ता है | बच्चों का मन कमजोर होता चला जाता है, वो डरफोक बन जाते हैं और अपने मन की बात को आपसे शेयर करने से भी डरते हैं अतः जब भी आपको बच्चों से कुछ करवाना हो तो उन्हें प्यार से समझाइए.

यदि बच्चों के मन पर बचपन से ही किसी बात को लेकर डर बैठ जाये तो फिर उसे निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है | बच्चा अपनी बात को किसी के सामने कहने से डरता है, उसके अंदर संकोच की भावना आ जाती है और वो जीवन में कभी भी स्टेज का सामना नहीं कर पाता.

नैतिक मूल्यों की सीख दें –

आजकल के पेरेंट्स अपने बच्चों पर पढ़ाई को लेकर बहुत अधिक दबाव डालते हैं कि वो अपनी क्लास में या अपने स्कूल में 90%या 100% स्कोर करे, क्यूँकि आजकल कम्पटीशन का जमाना है और कोई भी माता-पिता ये नहीं चाहते कि उनका बच्चा प्रतियोगिता के इस दौर में दूसरे बच्चों से पीछे रह जाये | लेकिन एक अच्छे पेरेंट्स वहीँ हैं जो ना सिर्फ अपने बच्चों को शिक्षित करें बल्कि उन्हें अच्छा इंसान बनाने में भी उनकी मदत करें और इसके लिए आपको बच्चों में नैतिक मूल्यों को डालना बहुत जरुरी है.

बच्चे सबसे ज्यादा वक्त अपने पेरेंट्स के साथ ही रहते हैं और घर को बच्चों की प्रथम पाठशाला भी कहा जाता है | इसलिए पेरेंट्स के पास भरपूर समय होता है अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालने का और उन्हें नैतिक मूल्यों का अर्थ बतलाने का | माता-पिता अपने बच्चों में जो संस्कार बचपन से डाल देते हैं वो जीवन भर उनके साथ चलते हैं.

एक अध्यापिका के रूप में मेरा ये अनुभव रहा है कि कुछ बच्चे पढ़ने में तो होशियार होते हैं  लेकिन ना ही वो अपने पेरेंट्स के साथ अच्छे तरीके से बात करते हैं और ना ही अपने टीचर्स के साथ और इसका कारण है उनमें नैतिक मूल्यों का अभाव होना.

आप बच्चों को बचपन से ही मॉरल स्टोरी वाली किताबें पढ़ने को दीजिए, ताकि ऐसी किताबों  को पढ़कर वो अच्छी बातें और अच्छी आदतें सीखें | बच्चों को कभी भी मारधाड़ और लड़ाई – झगड़े वाली किताबें पढ़ने को ना दें और ना ही उन्हें टी.वी पर ऐसे प्रोग्राम देखने दीजिये जिनमें हिंसा दिखाई गयी हो, क्यूँकि इससे बच्चा कुछ अच्छा नहीं सीखता है, वो जैसा पढ़ेगा या जैसा देखेगा वैसा ही बनता जायेगा.

अतः अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनाने के लिए उनमें अच्छे संस्कार डालना बहुत जरूरी है |  अपने बच्चों को प्यार से ये जरूर समझाएं कि सिर्फ पढ़ाई में आगे रहने से ही जीवन में सफलता नहीं मिलती बल्कि जीवन में सफल बनने के लिए उसके अंदर नैतिक मूल्यों व अच्छे   संस्कारों का होना भी उतना ही जरूरी है.

पेरेंट्स को भी ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सिर्फ किताबें पढ़ा लेने से ही वो बच्चों को संस्कारी नही बना सकते, बच्चों में अच्छे संस्कार पेरेंट्स को खुद ही डालने होते हैं | बचपन से ही अपने बच्चों को माता-पिता और बड़ों का आदर करना सिखाना चाहिए, अपने से छोटों को प्यार देना सिखाइए, लड़कियों की इज्ज़त करना सिखाइए और सिखाइए कि उन्हें कभी भी अपने से कमजोर व्यक्ति का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए और ना ही किसी को सताना चाहिए |

अगर बच्चे अपने घर में सबको सम्मान देते हैं और सबके साथ प्यार से रहते हैं तो वो अवश्य ही बाहर भी सबको सम्मान देंगे और अपने टीचर्स का भी सम्मान करेंगे.

शेयरिंग करना सिखाएं –

बच्चों को शेयरिंग करना सिखाएं, जो बच्चा शेयरिंग करना सीखता है वही केयरिंग करना अर्थात् दूसरों का ध्यान रखना भी सीख पायेगा | साथ ही उसे ये भी बताएं कि उसे जितना मिला है उसी में संतोष करना भी आना चाहिए ना कि और ज्यादा पाने की ज़िद करनी चाहिए क्यूँकि यदि बच्चे को संतोष करना नहीं आता तो उसका मन सदैव दुखी ही रहेगा.

बच्चों की गलती पर पर्दा ना डालें –

कुछ पेरेंट्स बार-बारअपने बच्चों की गलतियों पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं | पेरेंट्स ऐसी गलती कभी ना करें, क्यूँकि अगर आप हर बार बच्चे की गलतियों को छुपाते जाएंगे तो बच्चे को अपनी गलती का एहसास कभी होगा ही नहीं और वो फिर से वही गलती दोहराता चला जायेगा और भविष्य में वो गलत रास्ते पर भी जा सकता है.

जिम्मेदारी लेना सिखाएं –

बच्चों को जिम्मेदारी लेना सिखाइए, जैसे कि अगर घर में किसी की तबियत ख़राब है या कोई बीमार है तो कैसे सबको मिलकर उसका ध्यान रखना चाहिए ना कि सिर्फ अपने ही बारे में सोचना चाहिए | ऐसा ना हो कि आप घर में बीमार पड़े हैं और बच्चा सिर्फ टी.वी देखने में, गेम खेलने में या अपने काम में ही बिजी हैं और उसे आपकी कोई परवाह ही नहीं है | यदि आप अपने बच्चे को जिम्मेदारी लेना सिखाते हैं तो वो दूसरों की देखभाल करना भी सीखेगा.

घर में मेहमान के आने पर उन्हें पानी देना, पौधों को पानी देना, पानी की बोतल भरकर फ्रिज में रखना इस तरह के घर के छोटे-छोटे कामों में उनका सहयोग लेने से आपके बच्चे जिम्मेदारी लेना और निभाना दोनों सीखते हैं.

भौतिक सुखों की आदत ना डालें –

जितना हो सके बच्चों को भौतिक सुखों से दूर रखिए | जितना ज्यादा comforts आप अपने बच्चों को देंगे वो उतने ही कमजोर होते जाएंगे | ये जरूरी नहीं कि आप अपने बच्चों की हर ज़िद को पूरा करें | जरूरत से ज्यादा ना तो उन्हें कोई चीज़ दें और ना ही कोई comforts दें |

बच्चों को जो चीज़ बिना जरूरत और बिना मेहनत के मिलती है वो उस चीज़ की कीमत नहीं समझते हैं, इसलिए बच्चों को वही दीजिए जिसकी उन्हें वाकई में जरूरत है | अतः बच्चों को कड़ी मेहनत करके सब कुछ पाने की सीख दीजिए.

बच्चों को शारीरिक, भावनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाइए | भौतिक या शारीरिक सुख देने की बजाय आप बच्चों को सिखाइए कि किस तरह से उन्हें अपने मन को मजबूत बनाना आना चाहिए.

उन्हें इमोशनली स्ट्रांग बनाइए अर्थात बच्चे को समझाइए कि कैसी भी परिस्थिति हो, कैसा भी माहौल हो और कैसे भी लोग हो, आपको हर परिस्थिति में स्टेबल यानि की एक जैसा रहना है और एडजस्ट करना सीखना है | जो बच्चे किसी भी परिस्थिति में स्वयं को ढालना सीख जाते हैं, वे बच्चे बुरे वक्त का सामना भी आसानी से कर लेते हैं.

पुराने ज़माने में राजघरानो के बच्चे भी राजमहल की सारी सुख सुविधाएं छोड़कर शिक्षा लेने गुरुकुल या आश्रमों में जाते थे और वहाँ पर पढ़ने के साथ-साथ खुद ही अपना सारा काम भी किया करते थे ताकि वो स्वावलंबी बन सकें, जीवन में काम आने वाले सभी कौशल सीख सकें और सामाजिक रूप से भी मजबूत बन सकें |

आजकल के बच्चों को इन comforts की आदत पड़ चुकी है इसलिए इनके बिना जीवन यापन करना उन्हें मुश्किल लगता है.

पेरेंट्स होने के नाते आपका ये कर्तव्य है कि आप अपने बच्चों को इस काबिल बनाएं कि वो इन सुख-सुविधाओं के बिना भी, बिना शिकायत किये अपनी जिंदगी को आसानी से जी सकें और जीवन में आने वाले कठिन समय का सामना मजबूती से करके आगे बढ़ सकें.

बच्चों के अच्छे दोस्त बनिए –

जब भी आपका बच्चा आपसे कुछ कहना चाहे तो अपने बच्चे की बातों को बहुत ध्यान से सुनें और respond भी करें | आप अपने बच्चे के अच्छे दोस्त बनिए, हर वक्त उन्हें सिर्फ समझाते ही ना रहें बल्कि एक दोस्त की तरह उन्हें समझने की भी कोशिश करें | बच्चे को घर में खुला माहौल दीजिए तभी वो अपने मन की हर बात आपसे बेझिझक कह पायेगा.

बच्चे के मन की हर एक बात, उसके विचार, उसके सपनों को जानने की कोशिश कीजिए | जो बच्चे अपने पेरेंट्स से जितना ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं वो उतना ही पेरेंट्स की बात को सुनते भी हैं और मानते भी हैं | पेरेंट्स को चाहिए कि वो अपने बच्चों की हर एक्टिविटी पर ध्यान दें |

बच्चों के मन में बहुत सवाल होते हैं और ये आपकी जिम्मेदारी है कि आप उनके जवाब दें | कभी भी उनके सवालों को नज़र अंदाज़ करने की कोशिश ना करें, और ना ही उन्हें डांट- डपटकर चुप करा दें, यदि आप ऐसा करेंगे तो हो सकता है कि एक दिन आपके बच्चे आपसे सवाल पूछना ही छोड़ दें | और आपसे दूर-दूर रहने लगे.

बच्चों के रोल मॉडल बनिए व घर पर अच्छा माहौल दीजिए –

सभी पेरेंट्स अपने बच्चों के रोल मॉडल होते हैं अतः जैसा आप व्यवहार करेंगे वैसा ही आपका बच्चा भी सीखेगा | बच्चों को घर में खुशनुमा वातावरण दीजिए ताकि बच्चों को भी घर में रहना अच्छा लगे | बच्चे आपकी हर एक बात को ध्यान से सुनते हैं और आपकी हर एक्टिविटी पर गौर करते हैं इसलिए उनके सामने वैसे ही रहें जैसा आप उन्हें बनाना चाहते हैं.

दोस्तों, घर के माहौल का बच्चे के मन पर बहुत असर पड़ता है | अगर घर का माहौल अच्छा है तो बच्चों में सकारात्मकता आती है, आत्मविश्वास आता है, इसके विपरीत यदि घर का माहौल अच्छा नहीं है तो बच्चा नकारात्मकता से भर जाता है, अपने काम व पढ़ाई में ध्यान नही दे पाता और सबसे पीछे रह जाता है.

इसलिए कभी भी अपने बच्चों के सामने लड़ाई-झगड़ा ना करें, ऊँची आवाज़ में ना चिल्लाएं तथा गलत व्यवहार ना करें | जहाँ पति-पत्नि में अच्छी आपसी समझ होगी वहाँ बच्चे भी अच्छा महसूस करेंगे और खुश रहेंगे.