बच्चों का पढ़ाई में मन कैसे लगाएं? – 10 Ways To Motivate Your Child To Study

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बच्चों का पढ़ाई में मन कैसे लगाएं? – 10 Ways To Motivate Your Child To Study

दोस्तों, आज हम बात करेंगे कि बच्चों का पढ़ाई में मन कैसे लगाएं? यानि How To Motivate Your Child To Study?. क्युकी आज पेरेंट्स की सबसे बड़ी समस्या यही है कि उनका बच्चा पढ़ाई में ध्यान ही नहीं देता | खेलना हो, टी.वी पर कार्टून या कोई फिल्म देखनी हो या फिर मोबाइल पर कुछ देखना हो तो बच्चा सारी रात जागकर भी देख लेगा लेकिन जैसे ही पढ़ाई की बात आती है, किताब खोलते ही बच्चे को नींद आने लगती है |

बच्चों का पढ़ाई में मन ना लगने के कारण-

दोस्तों, सबसे पहले बात करते हैं कि आखिर बच्चों का मन पढ़ाई में क्यूँ नहीं लग पाता है, क्यूँकि जब तक कारण का पता नहीं चलता तब तक उपाय के बारे में बात नहीं की जा सकती | बच्चों का पढ़ाई में मन ना लगने के बहुत से कारण हैं जिनमें से कुछ कारण हैं –

  • पढ़ाई का महत्व ना पता होना
  • अच्छा माहौल ना मिलना
  • जब exams आये तभी पढ़ाई करना
  • एकाग्रता की कमी होना
  • पेरेंट्स की expectations और pressure को ना झेल पाना
  • अनुशासन का अभाव होना
  • कोई टाइम-टेबल ना होना
  • कई सारे distraction

ये कुछ कारण हैं जिनकी वजह से बच्चे पढ़ाई में मन नहीं लगा पाते |

बच्चे का पढ़ाई में मन लगाने के तरीके – 10 Ways To Get Your Child Interested In Studies

तो आज हम इस टॉपिक के बारे में बात करेंगे कि पेरेंट्स को ऐसा क्या करना चाहिए कि बच्चों का मन पढ़ाई में लग सके –

बच्चे का टाइम-टेबल तय कीजिये

पढ़ाई करने से पहले सबसे जरूरी चीज़ है टाइम-टेबल सेट करना | सबसे पहले बच्चे का टाइम-टेबल सेट कीजिए जिसमें आप उसके पढ़ने का, खेलने का, टी.वी देखने का टाइम सेट करें | ध्यान रखिये, ये टाइम-टेबल आपको स्कूल के दिन के साथ-साथ छुट्टी के दिन के लिए भी बनाना है और इसे सिर्फ बनाकर ही नहीं रख देना है बल्कि इसे बच्चे से follow भी करवाना है |

ऐसा ना हो कि आज sunday है या छुट्टी है तो कोई टाइम-टेबल ही नहीं है और बच्चे को पता ही नहीं कि उसे आज क्या करना है | इसलिए बच्चे के लिए हर दिन का टाइम-टेबल बनाइए, इससे बच्चे को ये पता होता है कि उसे कौन सा काम किस वक्त करना है, और साथ ही बच्चा अनुशासन भी सीखता है | अनुशासन के साथ पढ़ाई करने वाला बच्चा जरूर कामयाब होता है |

अगर आप बचपन से ही बच्चे को टाइम-टेबल के अनुसार पढ़ने को कहेंगे तो धीरे-धीरे ये उसकी आदत बन जाएगी जो कि आगे चलकर उसके लिए सहायक सिद्ध होगी | भविष्य में जब बच्चा किसी कम्पटीशन की तैयारी करता है तो ये आदत उसके बहुत काम आती है |

बच्चे को पढ़ाई का महत्त्व बताइये

बच्चे को सबसे पहले तो ये पता होना चाहिये कि आखिर उसे पढ़ना क्यूँ है | अगर बच्चा ये बात समझ गया तो आपको उसे बार-बार ये नहीं कहना पड़ेगा कि “पढ़ाई करो, पढ़ाई करो’’| वो बिना बोले खुद ही अपनी पढ़ाई पर ध्यान देगा और मन लगाकर पढ़ाई करेगा |

जब बच्चा 5 साल का हो जाये तो आप उसे समझाइये कि उसके लिए उसकी पढ़ाई कितनी महत्वपूर्ण है | उसकी पहली प्राथमिकता पढ़ाई करना और स्कूल जाना है, ना की टी.वी देखना और गेम खेलना | उसे बताइये कि जैसे पापा का काम office जाना है, मम्मी का काम घर के काम करना व जॉब करना है, उसी तरह बच्चों का भी सिर्फ एक ही काम है और वो है मन लगाकर पढ़ाई करना |

बच्चों को समझाइये कि जीवन में कामयाब होने के लिए पढ़ाई करना कितना जरूरी है | कड़ी मेहनत और पढ़ाई से आप जीवन में ख़ुशी, पैसा, इज्ज़त, शोहरत सब कुछ हासिल कर सकते हैं | अगर आप बच्चों को इस तरह से समझायेंगे तो वे मोटीवेट होते हैं और पढ़ाई को गंभीरता से लेना शुरू करते हैं |   

ग्रेड नहीं, बच्चे के सीखने पर ज़ोर दीजिये –

बच्चे के लिए पढ़ाई का मतलब एन्जॉय करना होना चाहिए ना कि कोई जंग लड़ना | कुछ पेरेंट्स को बस यही शिकायत रहती है कि उनके बच्चे के मार्क्स या ग्रेड बहुत अच्छे नहीं आते | कई बार पेरेंट्स को अपने बच्चों से बहुत ज्यादा expectations होती हैं कि उनका बच्चा क्लास में हमेशा फर्स्ट आना चाहिये और अगर बच्चा ऐसा नहीं कर पाता है तो पेरेंट्स अपना गुस्सा बच्चे पर उतारने लगते हैं या उसे demoralize करते हैं, बच्चा इतना प्रेशर झेल नहीं पाता और motivate होने की बजाय वो demotivate हो जाता है | इसलिये बच्चे पर बहुत अधिक प्रेशर मत डालिये, उससे जितना हो सकता है उतना प्रयास करने दीजिये और उसके प्रयास को सराहिये |

कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि बच्चे ने बहुत मेहनत की हो लेकिन उसके मार्क्स उतने नहीं आ पाते जितना कि आपने उम्मीद की हो, ऐसे में आपको निराश नहीं होना चाहिये और ना ही बच्चे को कोसना चाहिये | आप बच्चे के सिर्फ ग्रेड या मार्क्स मत देखिये बल्कि बच्चे ने क्या नया सीखा है इस पर भी ध्यान दीजिये |

यदि बच्चे ने मेहनत की है तो उसके अच्छे प्रयास पर उसकी तारीफ़ करना ना भूलिये,  उसे प्यार से गले लगाइये, उसने अपनी मेहनत से जितना सीखा है उस पर खुश होइये उसे शाबाशी दीजिये और आगे बढ़ने के लिये प्रेरित कीजिये | आपके इन प्रयासों से बच्चा अच्छा फील करेगा, और खुश होकर पढ़ाई में मन लगायेगा |  

पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल दीजिये

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा मन लगाकर पढ़ाई करे तो इस बात का ख़ास ध्यान रखिये कि बच्चा कैसे माहौल में पढ़ना पसंद करता है | कुछ बच्चे pindrop silence यानि कि एकदम शांत माहौल में ही पढ़ पाते हैं तो कुछ बच्चे थोड़े शोर-गुल में भी आसानी से पढ़ लेते हैं |

अगर बच्चा शांत माहौल में पढ़ना पसंद करता है तो घर का वातावरण शांत रखिये | अगर उस वक्त घर में मेहमान आ जाएं तो उनके साथ धीरे-धीरे से बात कीजिये, क्यूंकि आपके जोर-जोर से बात करने से बच्चा पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पायेगा |

एक बार बच्चा पढ़ने बैठ गया तो फिर उसकी पढ़ाई ख़त्म हो जाने तक उसे बीच में कोई और अन्य काम करने को ना कहें | उसे शोर-शराबे से दूर, अलग कमरे में स्टडी टेबल पर पढ़ने को कहिये |

कुछ बच्चे ग्रुप में पढ़ने से जल्दी समझ पाते हैं और जल्दी याद कर पाते हैं तो अगर आपका बच्चा भी ग्रुप में पढ़ना पसंद करता है तो आप उसे ग्रुप में पढ़ने को कह सकते हैं | क्यूँकि ग्रुप में पढ़ने से बच्चों की काफ़ी सारी समस्याओं का हल निकल जाता है और नए-नए ideas भी मिलते हैं |

लेकिन इससे पहले ये भी ध्यान में रखिये कि जिस ग्रुप में आपका बच्चा पढ़ रहा है उसमें पढ़ाई करने वाले बच्चे ही शामिल हो ना कि फ़ालतू बातें करने वाले बच्चे जो सिर्फ टाइम को बर्बाद करें | दोस्तों का भी बच्चे की पढ़ाई पर बहुत असर पड़ता है इसलिए बच्चे के फ्रेंड सर्किल पर भी नज़र रखिये कि उसके दोस्त पढ़ाई में ध्यान देने वाले हैं या नहीं | अगर आपका बच्चा अच्छी संगत में है तो अपने दोस्तों से inspire होकर वो भी पढ़ेगा लेकिन यदि आपका बच्चा ऐसे दोस्तों के बीच रहता है जो पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो इससे आपके बच्चे का भी ध्यान भटक सकता है और वो पढ़ाई को लेकर लापरवाह हो सकता है |

बच्चे का पढ़ाई में मन लगाने के तरीके – 10 Ways To Get Your Child Interested In Studies

पहले दिन से ही हो पढ़ाई की शुरुआत

कई बच्चों की ये आदत होती है कि वो स्कूल का आधा session निकल जाने पर या exams शुरू होने से कुछ दिन पहले ही ये सोचना शुरू करते हैं कि अब उन्हें पढ़ना चाहिये क्यूँकि अब तो exams शुरू होने वाले हैं और पेरेंट्स भी ये सोचकर निश्चिंत रहते हैं कि अभी तो पढ़ाई के लिए बहुत वक्त बाकी है | लेकिन आप ऐसी गलती बिलकुल भी ना करें | कल-कल करते-करते, समय कब निकल जाता है पता ही नहीं चलता |

स्कूल शुरू होने के पहले दिन से ही बच्चों की पढ़ाई पर गंभीरता से ध्यान दीजिये | अगर बच्चा शुरुआत से पढ़ाई के प्रति खुद को फोकस करेगा और अपना पाठ याद करेगा तो exam के दौरान उस पर भार नहीं पड़ेगा और ना ही उसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी | क्यूँकि याद तो वो पहले ही कर चुका होता है और अब तो उसे सिर्फ revision करना होता है | ऐसा करने से बच्चा पढ़ाई को बोझ नहीं समझेगा और मन लगाकर पढ़ाई करेगा |

किताबों से बच्चों की दोस्ती करवाइये –

अगर बच्चों में बचपन से ही किताबों के प्रति लगाव ना हो तो वे बड़े होकर भी किताबों से दूर भागते हैं, इसलिए किताबों में उनकी रूचि पैदा करने के लिये आप छोटे से ही उनकी दोस्ती किताबों से कराइये | 3 साल का हो जाने के बाद बच्चों को खिलोनों के साथ-साथ कलरफुल किताबें भी लाकर दीजिये जिनमें सुन्दर चित्र बनें हों | इतना छोटा बच्चा पढ़ तो नहीं पाता है लेकिन चित्रों को देखकर वो अपने आस-पास की दुनिया को काफ़ी हद तक जान लेता है और समझ लेता है |

कलरफुल चित्रों को देखने से छोटे बच्चों में समझ और कल्पनाशीलता का विकास होता है और उनमें पढ़ाई को लेकर रूचि उत्पन्न होती है | धीर-धीरे जब बच्चा बड़ा होता जाता है तब उसे किताबों व पढ़ाई का महत्त्व समझाइये और उन्हें बताइये कि किताबें ही आपकी सबसे अच्छी दोस्त हैं, क्यूँकि जो जानकारी और ज्ञान आपको किताबें पढ़ने से मिलेगा उसी से आपको जीवन में सफलता व मान-सम्मान मिलेगा |

डिस्ट्रेक्शन से रखिये बच्चों को दूर

अक्सर हम देखते हैं कि कुछ पेरेंट्स बच्चे को पढ़ने के लिए बिठा देते हैं और खुद टी.वी देखने बैठ जाते हैं, या फ़ोन पर बात करने लगते हैं या फिर किसी दूसरे काम में व्यस्त हो जाते हैं तो फिर इतने सारे डिस्ट्रेक्शन के बीच बच्चा कैसे पढ़ पायेगा | जिस वक्त बच्चा पढ़ाई कर रहा है उस वक्त टी.वी या मोबाइल बिल्कुल बंद रखिये क्यूँकि इनसे बच्चे बहुत जल्दी डिस्ट्रेक्ट होते हैं और सही से पढ़ नहीं पाते |

बिल्कुल छोटे बच्चे यानि कि 10 साल से कम उम्र के बच्चे को पढ़ाते वक्त आप खुद भी उसके साथ बेठिये | उसे अकेले कमरे में मत पढ़ने दीजिये, अपने पास बिठा कर ही उसे पढ़ाइये, उसे होमवर्क कराइये या फिर कुछ याद करने को दीजिये | लेकिन यदि बच्चा 10 साल से ज्यादा उम्र का है तो आप उसे अकेले कमरे में पढ़ाई करने को बोल सकते हैं, क्यूँकि बड़े बच्चे अकेले में ही ज्यादा अच्छी तरह से याद कर पाते हैं |

पढ़ाई में ध्यान देने के लिये मन का एकाग्र होना बहुत जरूरी है | कुछ बच्चे इतने चंचल होते हैं कि पढ़ाई के वक्त भी उनका ध्यान इधर-उधर भटकता रहता है अतः बच्चों की पढ़ाई के लिए ऐसी जगह चुनें जहाँ पर कोई गेजेट्स ना रखे हों | बच्चों में एकाग्रता बढ़ाने के लिये उन्हें रोज मेडीटेसन या ध्यान करवाइये, ॐ की ध्वनि निकालने को बोलिये | ऐसा करने से बच्चों का मन शांत होगा, उनकी एकाग्रता बढ़ेगी और पढ़ाई में मन लगेगा |

इन्सपिरेसन और मोटीवेसन है जरूरी

5 साल का हो जाने पर बच्चे को पढ़ने के लिए मोटीवेट कीजिये | आप स्वयं भी बच्चे के सामने कोई किताब निकालकर पढ़ सकते हैं | बच्चे अपने से बड़ों का ही अनुकरण करते हैं, जब बच्चा आपको पढ़ता हुआ देखेगा तो वह स्वतः ही पढ़ना शुरू कर देगा |

शुरू-शुरू में आप उसे स्टोरी बुक पढ़ने को दे सकते हैं, स्टोरी books बच्चे की सोचने-समझने की छमता तथा उनकी तार्किक शक्ति को बढ़ाने में सहायक होती हैं जो कि भविष्य में भी उनके काम आती है | इस तरह, पढ़ना बच्चे की आदत बन जायेगी और वो अपने स्कूल की किताबों को भी स्वेच्छा से पढ़ने में रूचि लेने लगेगा |

पढ़ाई करने के लिए किसी इन्स्पिरतिओन का होना बहुत आवश्यक है | बच्चों को अपने किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार से मिलाइये जो उच्च व सम्मानित पद पर हो और बातों ही बातों में बच्चे को ये बताइये कि किस तरह से मन लगाकर पढ़ाई करके और कड़ी मेहनत करके वो उस पद पर पहुँचे हैं | बच्चा उनके जीवन के वास्तविक अनुभवों को सुनकर जरूर प्रेरित होगा और उसके अंदर भी पढ़ाई को लेकर रूचि जागृत होगी और फिर वो मन लगाकर पढ़ाई करेगा |

बच्चे को उसके लक्ष्य के प्रति बचपन से ही inspire करते रहें | उसे बताइये कि जो भी वो बनना चाहता है, उसके लिए उसे पढ़ाई तो करनी ही पढ़ेगी, तभी वो अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकता है |

पढ़ाई के दौरान ब्रेक भी दीजिये

पढ़ाई के लिये बच्चों को लगातार तीन-चार घंटे तक बैठाकर मत रखिये, इससे बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता बल्कि वो पढ़ाई से ऊबने लगता हैं | एक-दो घंटा पढ़ाने के बाद बच्चे को थोड़ा ब्रेक देना भी जरूरी है | पढ़ाई के दौरान बच्चे को 10 या 15 मिनट का ब्रेक दीजिये | बीच-बीच में ब्रेक देने से बच्चे का माइंड फ़्रेश होता है और वो दुबारा से कंसंट्रेशन के साथ पढ़ने बैठता है |

एक सब्जेक्ट का होमवर्क करने के बाद या सब्जेक्ट को याद कर लेने के बाद उसे थोड़ा  ब्रेक भी दीजिये ताकि ब्रेक के बाद वो फिर से नयी ऊर्जा के साथ पढ़ाई कर सके | अगर छोटे बच्चे को आप लगातार तीन या चार घंटे तक बैठाकर रखेंगे और सारे विषय एक साथ याद करने को कहेंगे तो वो सब कुछ भूल जायेगा |

ध्यान रखिये, आप बच्चे को जबरदस्ती करके नहीं पढ़ा सकते, बच्चे की लगन खुद ही पढ़ाई में होनी चाहिये | इसलिए बच्चे को रिफ्रेश रखने के लिये उसे ब्रेक देते रहें, बच्चे के साथ टोका-टाकी ना करें और पढ़ाई के वक्त उसे डाटीये मत |

पढ़ाई करने पर बच्चे को रिवॉर्ड दीजिये –

बाल मनोविज्ञान के अनुसार रिवॉर्ड यानि कि ईनाम बच्चों के लिये motivation का काम करता है जो उन्हें किसी काम को करने के लिये प्रेरित करता है | अतः आप बच्चे को ये बताइये कि यदि वो तय समय पर अपनी पढ़ाई पूरी कर लेता है या अपना पाठ याद कर लेता है तो उसे पढ़ाई के लिये ईनाम दिया जायेगा | ईनाम पाने के लालच में बच्चा जरूर पढ़ाई करेगा |

पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद आप उसे उसकी मनपसंद चीज़ खाने को दीजिये, टी.वी पर उसकी पसंदीदा फिल्म या कार्टून देखने दीजिये, या उसे खेलने को कहिये, इससे बच्चा फिर दोगुने उत्साह के साथ पढ़ाई करने बैठेगा |

YouTube विडियो – क्या करें कि बच्चे पढ़ाई करें.