चैत्र नवरात्रि 2021 – चैत्र नवरात्रि का महत्व

660
चैत्र नवरात्रि - चैत्र नवरात्रि का महत्व

चैत्र नवरात्रि कब है? – Chaitra Navratri Kab Hai?

‘नवरात्रि’ शब्द का अर्थ है नव अहोरात्रि (विशेष रात्रि) अर्थात् ‘नौ विशेष रातें’. नवरात्रों के समय पूरे 9 रातों और 10 दिनों तक शक्ति के नवस्वरूपों की उपासना की जाती है एवं दसवां दिन ‘विजयादशमी’ या ‘दशहरा’ के नाम से जाना जाता है.

मां दुर्गा के नौ स्वरुप हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री.

हिन्दू धर्म में नवरात्रि एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो कि साल में चार बार मनाया जाता है. चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, माघ नवरात्रि और आषाढ़ नवरात्रि. नवरात्रि के मौके पर मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है.

ऐसी मान्यता है कि नवरात्रों के दिनों में मां दुर्गा धरती पर स्वयं अपने भक्तों के साथ रहने आती हैं और जो भी श्रद्धा भाव से मां की आराधना करते हैं मां उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं.

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल 2021 में चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल, मंगलवार से 22 अप्रैल 2021 तक रहेंगे. चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है अतः, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है और अखंड ज्योति जलाई जाती है.

चैत्र नवरात्रि कैसे मनाई जाती हैं? – Chaitra Navratri Kaise Manai Jati Hai?

नवरात्रि का उत्सव भारत के अलग-अलग राज्यों में बड़ी ही धूमधाम और श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है. नवरात्रि के मौके पर माता के भक्त पूरे 9 दिन तक उपवास रखकर मां की उपासना करते हैं. नवरात्रि में देवी के शक्तिपीठ और सिद्धपीठों पर भारी मेले लगते हैं.

माता का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रों के दौरान प्रत्येक दिन इस श्लोक की स्तुति करना शुभ होता है:

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

गुजरात में यह त्यौहार बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. गुजरात में नवरात्रि समारोह में ‘डांडिया’ और ‘गरबा’ का विशेष आयोजन किया जाता है. देवी के सम्मान में भक्ति प्रदर्शन के रूप में ‘गरबा’, आरती होने से पहले किया जाता है और डांडिया समारोह के बाद किया जाता है. इसी प्रकार पश्चिम बंगाल में ‘दुर्गा पूजा’ को बंगालियों के प्रमुख त्यौहार के रूप में मनाया जाता है.

किस दिन कौन सी देवी की पूजा होती है? – जानिये आज कौन सी देवी की पूजा है?

इस साल 2021 में चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 13 अप्रैल, मंगलवार से हो रहा है और इसका समापन 22 अप्रैल 2021 को होगा. आइए अब जानते हैं कि नवरात्रि में किस दिन कौन सी देवी की पूजा की जाती है.

  • पहला दिन : मां शैलपुत्री की पूजा होती है
  • दूसरा दिन : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है
  • तीसरा दिन : मां चंद्रघंटा की पूजा होती है
  • चौथा दिन : मां कूष्मांडा की पूजा होती है
  • पांचवा दिन : मां स्कंदमाता की पूजा होती है
  • छठा दिन : मां कात्यायनी की पूजा होती है
  • सातवां दिन : मां कालरात्रि की पूजा होती है
  • आठवां दिन : मां महागौरी की पूजा होती है
  • नौवां दिन : मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है
  • दसवां दिन : व्रत पारण

चैत्र नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? – Chaitra Navratri Kyon Manai Jati Hai?

चैत्र नवरात्रि मनाने के पीछे कई कारण हैं. नवरात्रि उत्सव देवी अंबा का प्रतिनिधित्व करता है. इस पर्व से जुड़ी एक कथा के अनुसार, नवरात्रि के दिनों में ही मां दुर्गा ने एक भैंस रुपी असुर ‘महिषासुर’ का वध किया था. नौ दिनों तक देवी और महिषासुर का संग्राम हुआ था और अंत में महिषासुर-वध करके देवी मां महिषासुर मर्दिनी कहलायीं.

चैत्र मास की नवमी के दिन ही भगवान श्री राम का जन्म हुआ था इसलिए चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्रि भी कहा जाता है और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में रामनवमी मनाई जाती है.

नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व – Navratri Me Kanyaa Pujan Ka Mahatv

नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्त्व होता है और बिना कन्या पूजन के नवरात्रि के व्रत सफल नहीं माने जाते हैं. नवरात्रि में लोग अष्टमी या नवमी पे 9 छोटी कन्याओं के साथ एक बालक का भी पूजन करते हैं.

ये सभी कन्याएं देवी मां का रूप और एक बालक भैरव का प्रतीक माना जाता है. पूजन करने के बाद इन सभी कन्याओं को भोजन भी कराया जाता है और इसके पश्चात उन्हें दक्षिणा के रूप में कुछ रूपए-पैसे या कोई उपयोगी वस्तु ज़रूर दी जाती है.

चैत्र नवरात्रि का महत्व ज्योतिषीय, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्त्व क्या है? – Chaitra Navratri Ka Mahatv

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्त्व है. इस नवरात्रि के दौरान सूर्य का राशि परिवर्तन होता है और सूर्य पहली राशि मेष में प्रवेश करते हैं.

चैत्र नवरात्रि का धार्मिक महत्त्व भी है क्योंकि, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही आदिशक्ति दुर्गा प्रकट हुई थीं और उन्हीं के कहने पर ब्रह्माजी ने श्रृष्टि निर्माण का कार्य शुरू किया था.

इसीलिए चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा से हिन्दू नववर्ष का भी प्रारंभ माना जाता है. चैत्र नवरात्र में ही भगवान श्री राम का भी जन्म हुआ था अतः धार्मिक दृष्टि से भी नवरात्रि महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.

वैज्ञानिक दृष्टि से भी नवरात्रि का महत्त्व है. नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति को प्राप्त करने के लिए व्रत, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं. नवरात्रि में व्रत रखने से तन, मन और आत्मा शुद्ध होती है.

नवरात्रि के दौरान किये जाने वाले हवन और पूजन में कई तरह की जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों का प्रयोग किया जाता है जो कि सभी के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होती हैं.

हवन और यज्ञ से उठने वाली अग्नि और धुंआ समस्त वातावरण को शुद्ध कर देता है. यह मष्तिष्क, फेफड़ों और सांस संबंधी समस्या को दूर करने की भी क्षमता रखता है.

नवरात्रि से जुड़े सवाल-जवाब

  1. नवरात्रि कब से शुरू है?

    साल 2021 में चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 13 अप्रैल, मंगलवार से हो रहा है और इसका समापन 22 अप्रैल 2021 को होगा.

  2. दुर्गा अष्टमी कब है?

    दुर्गा अष्टमी नवरात्रि के आठवें दिन मनाई जाती है. इस दिन मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है. इस साल 2021 में दुर्गा अष्टमी 20 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी.

  3. कलश स्थापना कब है?

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है. इस साल 2021 में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल को सुबह 5:58 बजे से शुरू हो जाएगा और 10:14 बजे तक रहेगा.

आप सभी को चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं.

…. HAPPY NAVRATRI ..