गर्भपात के लक्षण और कारण क्या हैं? – 20 Miscarriage Symptoms & Causes

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गर्भपात के लक्षण और कारण - 20 Miscarriage Symptoms & Causes

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मिसकैरेज यानि गर्भपात क्या है ?

मिसकैरेज यानि की गर्भपात का अर्थ है भ्रूण की गर्भ में ही मृत्यु हो जाना. मेडिकल की भाषा में इसे ‘प्रेगनेंसी लॉस’ भी कहते हैं. आज हम आपको गर्भपात के लक्षण और कारणों के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं इसलिए इस पोस्ट को अंत तक जरुर पढ़िये.

यदि प्रेगनेंसी के 12वें सप्ताह से पहले ही गर्भ में भ्रूण की मृत्यु हो जाये तो इसे प्रारंभिक गर्भपात कहते हैं लेकिन यदि प्रेगनेंसी के तीन माह बाद गर्भपात हो तो इसे लेट मिसकैरेज या ‘स्टिलबर्थ’ (still birth) कहते हैं.

एक हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में कम से कम 30% प्रेगनेंसी गर्भपात के कारण ख़त्म हो जाती हैं और यह गर्भपात अधिकतर गर्भावस्था के पहले 12 हफ़्तों में ही हो जाता है. किसी भी महिला के जीवन में गर्भपात एक बहुत ही दुखद स्थिति होती है जिससे उबरने में महिला को काफ़ी समय लग जाता है.  

गर्भपात जितना शारीरिक रूप से तकलीफदायक होता है उससे कई ज्यादा यह भावनात्मक रूप से महिला को तकलीफ देता है और उन्हें मानसिक रूप से कमज़ोर बना देता है.

अतः ऐसे में पूरे परिवार का ये फ़र्ज़ बनता है कि इस स्थिति से उबरने में महिला की पूरी मदत करें ताकि वह इस सदमे से जल्द से जल्द उबर सके. कुछ महिलाओं को तो गर्भपात का यह दर्द बार-बार सहना पड़ता है.

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गर्भपात के लक्षण

कभी-कभी प्रेगनेंट महिला को अपनी प्रेगनेंसी का पता भी देर से चलता है और कई बार तो वे ये भी नहीं समझ पाती हैं कि उनका गर्भपात हो चुका है.

नीचे कुछ गर्भपात के लक्षण बताए गए हैं जिन्हें देखकर आप ये समझ सकती हैं कि आपका गर्भपात होने वाला है या फिर हो चुका है.

adhura garbhpat ke lakshan
  1. गर्भपात का पहला लक्षण है, गर्भावस्था के पहले ट्राइमेस्टर अर्थात् पहली तिमाही में योनि से रक्त स्राव होना. इसमें आपको स्पोटिंग, खून के थक्के या अधिक रक्त स्राव हो सकता है. यह रक्त भूरे या गहरे लाल रंग का हो सकता है. इस बात का विशेष ध्यान रखिए कि हर प्रकार की ब्लीडिंग का मतलब मिसकैरेज नहीं होता है. यदि आपको बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है और साथ ही टिश्यू या clots भी आ रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाइए.
  2. पेट के निचले हिस्से यानि की पेडू में ऐंठन या मरोड़ जैसा दर्द होना. यह दर्द पीरियड के समय होने वाले दर्द जैसा या कभी-कभी उससे भी तेज दर्द हो सकता है.
  3. प्रेगनेंसी के दौरान वैसे तो कभी-कभी पीठ दर्द होता है लेकिन जब यह दर्द असहनीय हो जाये तो आपको अपने डॉक्टर को दिखाने में बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह दर्द आपके गर्भपात का संकेत हो सकता है.
  4. प्रेगनेंसी वाले लक्षण अचानक से गायब हो जाना, जैसे- प्रेगनेंसी के समय प्रेगनेंट महिला के स्तन टाइट हो जाते हैं, इनमें दर्द होने लगता है और उनका आकार भी बढ़ने लगता है, लेकिन स्तन का ढीला पड़ जाना गर्भपात का लक्षण हो सकता है. यदि उल्टी, मतली आना भी बंद हो जाये तो ये भी गर्भपात का संकेत हो सकता है.
  5. पांचवे महीने के बाद गर्भ में शिशु हलचल करना शुरू कर देता है, लेकिन यदि आपके शिशु ने अचानक से हलचल करना बंद कर दिया है तो गर्भपात की संभावना हो सकती है. इसी प्रकार गर्भावस्था के छठें महीने में गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कन सुनाई देने लगती है लेकिन यदि यह ना सुनाई दे तो हो सकता है कि आपका गर्भपात हो गया हो.
  6. गर्भपात का एक लक्षण है, अचानक से गर्भवती महिला के वजन में कमी आना. गर्भावस्था के समय महिला के वजन में निरंतर वृद्धि होनी चाहिए लेकिन जब वजन बढ़ने की बजाय कम होने लगे तो आपको डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए.

गर्भपात के कारण

गर्भपात कई कारणों से हो सकता है लेकिन यहां कुछ संभावित कारण दिए गये हैं जिनके बारे में हर गर्भवती महिला को पता होना चाहिए, जिससे महिला पहले से ही सावधानी बरते और अपना ध्यान रखें.

  1. गर्भपात होने का मुख्य कारण है गर्भवती महिला के शरीर में हार्मोन्स का असंतुलन. कई बार गर्भवती महिला के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन नामक हार्मोन्स पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाते हैं जो कि प्रेगनेंसी के लिए बहुत ही जरूरी माने जाते हैं. इसलिए महिला का प्रारंभिक अवस्था में ही गर्भपात हो जाता है. इसी तरह एस्ट्रोजन नामक हार्मोन की अधिकता के कारण भी गर्भपात हो सकता है.
  2. कभी-कभी कुछ असावधानियों के कारण भ्रूण की गर्भ में ही मृत्यु हो जाती है, जैसे- गर्भावस्था के दौरान भारी वजन उठाना, कभी पेट में जोर का झटका लगने से, लगातार खड़े रहने से, आराम ना करने से, अधिक सीढियां चढ़ने से, ज्यादा सफ़र करने से, पेट में दबाव पड़ने से, गर्म तासीर वाली चीज़ें खाने से गर्भपात हो जाता है.
  3. कभी-कभी शारीरिक कमजोरी के कारण भ्रूण सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाता है. यदि अंडे या स्पर्म की क्वालिटी अच्छी नहीं है तो भी भ्रूण सही से विकसित नही हो पाता और इस कारण गर्भपात होने का खतरा बना रहता है.
  4. गलत दवाओं के सेवन से भी गर्भपात होने की संभावना रहती है. अक्सर महिलाएं किसी भी प्रकार का दर्द होने पर बिना डॉक्टर से पूछे स्वयं ही दर्द निवारक दवाओं का सेवन कर लेती हैं या फिर कभी ऐसा भी होता है कि डॉक्टर को अपनी प्रेगनेंसी के बारे में बताए बिना ही आप अन्य किसी दूसरी बीमारी की भी दवाई ले रही हैं तो यह आपके गर्भपात का कारण बन सकता है. इसलिए किसी भी बीमारी के इलाज के लिए जब भी आप किसी डॉक्टर के पास जाती हैं तो उन्हें सबसे पहले अपनी प्रेगनेंसी के बारे में ज़रूर बताएं.
  5. प्लेसेंटा प्रिविआ की स्थिति भी गर्भावस्था को प्रभावित करती है. जब गर्भनाल या प्लेसेंटा जो कि बच्चे के विकास में अहम् रोल निभाता है, ठीक गर्भाशय के मुंह पर स्थित हो जाता है तो यह स्थिति महिला के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. अगर गर्भावस्था के अंतिम दौर में भी प्लेसेंटा नीचे की तरफ़ ही रहता है तो यह मिसकैरेज का कारण बन सकता है.

गर्भपात के कुछ और अन्य कारण

  1. वेजाइना में किसी भी तरह का संक्रमण
  2. आनुवांशिक कारण
  3. गर्भवती महिला को थायराइड, शुगर, उच्च रक्तचाप या अस्थमा होना   
  4. बच्चेदानी में खराबी, बच्चेदानी का मुंह छोटा होना, इसमें बार-बार संक्रमण या रसौली
  5. गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक मात्रा में नशीले पदार्थों का सेवन व धूम्रपान
  6. शरीर में पोषक तत्वों और पर्याप्त पानी की कमी होना
  7. प्रेगनेंसी के शुरू के तीन महीनों में बहुत अधिक तनाव लेना
  8. खराब लाइफस्टाइल और पर्याप्त नींद ना लेना
  9. जो महिलाएं 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भ धारण करती हैं और जिनका इससे पहले भी कभी गर्भपात हो चुका है उनमें मिसकैरेज होने की संभावना अधिक होती है.
  10. बहुत अधिक मात्रा में कॉफ़ी व कैफ़ीन लेना   
  11. प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भागदौड़ या ज्यादा सफ़र करना
  12. गर्भाशय ग्रीवा का कमजोर होना
  13. प्रेगनेंट महिला के साथ कोई दुर्घटना हो जाना, चोट लग जाना
  14. डॉक्टर से समय पर जाँच ना करवाना
  15. किसी भी प्रकार का रेडियेशन गर्भपात का कारण बन सकता है.

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