Mobile Phone Addiction क्या है? – कहीं आपको भी मोबाइल की लत तो नहीं है?

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Mobile Phone Addiction क्या है? - कहीं आपको भी मोबाइल की लत तो नहीं है?

विज्ञान के इस आधुनिक युग में टेक्नोलॉजी ने हमारे मुश्किल से मुश्किल काम आसान तो कर दिए हैं लेकिन, आज इसी टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल भी किया जा रहा है.

आज के समय में जहां एक ओर टेक्नोलॉजी के फायदे बहुत हैं तो वहीं दूसरी ओर इसका अत्यधिक प्रयोग एक प्रॉब्लम बन चुका है. ऐसी ही एक प्रॉब्लम का नाम है Mobile Phone Addiction.

यह प्रॉब्लम तब तक नहीं थी जब तक स्मार्टफोन नहीं आए थे. टेक्नोलॉजी जितनी ज्यादा विकसित हो रही है, फोन दिन-ब-दिन उतने ही ज्यादा स्मार्ट होते जा रहे हैं.

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मोबाइल फोन की लत यानि ख़तरे की घंटी

भारत में 95% लोग सोने से पहले अपने स्मार्टफोन का प्रयोग करते हैं. यदि आप दिन-रात अपने मोबाइलन फोन में ही लगे रहते हैं, आपको अपने मोबाइल फोन में बार-बार नोटिफिकेशन्स को चेक करने की आदत है, खाना खाते वक़्त भी आप मोबाइल को नहीं छोड़ सकते, सुबह उठते ही सबसे पहले यदि आपको मोबाइल की ज़रुरत पड़ती है और देर रात तक जागकर आप मोबाइल फोन में चैटिंग, मैसेजिंग या फिर गेमिंग में व्यस्त रहते हैं तो इसका अर्थ ये है कि आप Mobile Phone Addiction के शिकार हो चुके हैं यानि की आपको अपने स्मार्टफोन की बुरी लत लग चुकी है.

और ये बुरी लत धीरे-धीरे आपकी लाइफस्टाइल के साथ-साथ ही आपके स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा असर डालती है. इसलिए यदि आपके स्मार्टफोन को साइलेंट किलर कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा.

दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी ‘एप्पल‘ के निर्माता और जाने-माने अमेरिकी उद्योगपति स्टीव पॉल जॉब्स ने दुनिया में आई फोन (iphone) लाकर तहलका मचा दिया था लेकिन, उन्होंने कभी भी अपने बच्चे को आई फोन का इस्तेमाल नहीं करने दिया.

फेसबुक‘ के सी.ई.ओ मार्क ज़ुकरबर्ग दिन भर फेसबुक पर अपना कीमती वक़्त बर्बाद नहीं करते हैं बल्कि इस कोशिश में लगे रहते हैं कि फेसबुक को और भी ज्यादा अट्रैक्टिव कैसे बनाया जाए जिससे ज्यादा से ज्यादा यूज़र्स उन्हें मिल सकें.

ठीक इसी तरह, मोबाइल कंपनियां भी हर वक़्त इसी कोशिश में लगी रहती हैं कि मोबाइल फोन की एप्लीकेशन्स और मोबाइल फोन के फ़ीचर्स को ज्यादा से ज्यादा अट्रैक्टिव कैसे बनाया जाए जिससे उनके यूज़र्स की संख्या में और भी ज्यादा बढ़ोत्तरी हो सके और कंपनी और भी ज्यादा मुनाफ़ा कमा सके.

मोबाइल एप्लीकेशन्स को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि यूज़र्स ज्यादा समय तक उन एप्लीकेशन्स पर ही चिपके रहते हैं.

कोई भी मोबाइल कपंनी मोबाइल फोन से होने वाले खतरों की सही जानकारी आपको पूरी तरह से नहीं देती है, लेकिन ये आपको सोचना है कि आप अपने मोबाइल फोन के साथ क्या करते हैं, उसे किस तरह से इस्तेमाल करते हैं.

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सुबह से रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल

Misuse of Mobile Phone -  सुबह से रात तक फ़ोन

सुबह से रात तक फोन का इस्तेमाल यानि साल में 1800 घंटे मोबाइल के नाम. अपने स्मार्टफोन पर ब्राउसिंग, चैटिंग, टाइपिंग, स्क्रॉलिंग और स्वीपिंग करते-करते आपका कितना वक़्त बर्बाद हो जाता है आपको पता भी नहीं चलता.

आजकल ऑनलाइन गेमिंग में बच्चे तो क्या, बड़े भी इतने व्यस्त रहते हैं कि इसमें घंटो निकाल देते हैं. इंटरनेट गेमिंग ने बड़ों के साथ-साथ बच्चों को भी इंटरनेट एडिक्ट बना दिया है. और यही है Mobile Phone Addiction.

अकेले भारत में ही वाट्सऐप यूज़र्स की संख्या सबसे ज्यादा है जो कि पूरी दुनिया में सबसे बड़ा आँकड़ा है और दूसरे नंबर पर ब्राज़ील का स्थान आता है.

फेसबुक पर अपना अधिकांश समय बिताने वालों की संख्या भी कुछ कम नहीं है जबकि हकीक़त तो ये है कि, जितना ज्यादा हम सोशल मीडिया से कनेक्ट हो रहे हैं अपनों से उतना ही ज्यादा डिसकनेक्ट होते जा रहे हैं.

दोस्तों, ये बात भी ध्यान में रखिए कि मोबाइल फोन समस्या नहीं है बल्कि, अनावश्यक रूप से और ज़रुरत से ज्यादा मोबाइल फोन का अधिक प्रयोग करने से और इससे निकलने वाले रेडिएशन की वजह से जो दिक्कतें आपके साथ होती हैं वो समस्या है.

ये बात सच है कि आज के समय में मोबाइल रखना सबकी ज़रुरत भी है और मजबूरी भी लेकिन, स्मार्टफोन आपकी ज़िंदगी का सिर्फ़ एक हिस्सा भर है आपकी ज़िंदगी नहीं है.

इसलिए कोशिश कीजिए कि आप अपने स्मार्टफोन को कंट्रोल करें ना कि आपका स्मार्टफोन आपकी ज़िंदगी को कंट्रोल करने लगे.