हाई कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड बढ़ने पर क्या न खाएं

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हाई कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड बढ़ने के मुख्य कारण

हार्ट की बीमारी आज के समय में भारत में नंबर वन बीमारी बन चुकी है और यहाँ पर करीब-करीब हर 10 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हार्ट अटैक से हो जाती है. लेकिन यदि आप चाहें तो इस बीमारी को रोक सकते हैं.

अब आप कहोगे वो कैसे? तो इसका जवाब है कि यदि इस बीमारी की असली जड़ को ही समाप्त कर दिया जाए तो इस बीमारी को रोका जा सकता है.

दरअसल हमारे हार्ट की ट्यूब के अंदर दो चीज़ जमा होती है जिसके कारण हार्ट में ब्लॉकेज हो जाती है और हार्ट अटैक आता है. एक है कोलेस्ट्रॉल और दूसरा है ट्राइग्लिसराइड.

हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण

कोलेस्ट्रॉल दो तरह के भोजन में पाया जाता है, एक तो नॉनवेज भोजन में और दूसरा दूध में. अगर दूध की सारी मलाई निकाल दी जाए तो उसके बाद दूध का सेवन किया जा सकता है और नॉनवेज खाना बंद कर दिया जाए तो कोलेस्ट्रॉल का इनपुट आपके शरीर में बिल्कुल बंद हो सकता है. इससे हार्ट अटैक होने की संभावना को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है.  

हाई ट्राइग्लिसराइड बढ़ने के कारण

ट्राइग्लिसराइड दो तरीके से बनता है. एक तो स्वयं हमारा शरीर बनाता है क्योंकि, ट्राइग्लिसराइड हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. जब भी आपके शरीर को एनर्जी की ज़रुरत होती है तो वो एनर्जी आपके शरीर को ट्राइग्लिसराइड से मिलती है.

मगर जब आपका शरीर बहुत अधिक मात्रा में ट्राइग्लिसराइड बनाने लगता है तो वो ट्राइग्लिसराइड आपके शरीर में जमा होने लगता है और इसी जमा हुए ट्राइग्लिसराइड को हार्ट का फैट कहा जाता है. आपके शरीर में अत्यधिक मात्रा में ट्राइग्लिसराइड के बनने का मुख्य कारण है आपके द्वारा तेल का बहुत अधिक मात्रा में सेवन करना.

जब भी आप बहुत अधिक मात्रा में ऑयली फ़ूड और फ़ास्ट फ़ूड खाने लगते हो तो आपके शरीर में बहुत अधिक मात्रा में ट्राइग्लिसराइड जमा होने लगता है. जिसके कारण हार्ट में ब्लॉकेज आ जाती है और हार्ट अटैक के चांसेस बढ़ जाते हैं.

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जानिए हाई कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड बढ़ने पर क्या नहीं खाना चाहिए?

  • अगर आपका हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है तो आपको फुल क्रीम मिल्क बिलकुल भी नहीं पीना चाहिए. आप चाहें तो दूध से सारी मलाई निकालने के बाद दूध का सेवन कर सकते हैं.
  • नॉनवेज का सेवन करना बिल्कुल बंद कर दीजिए.
  • घी और मक्खन का सेवन भी बंद कर दीजिए क्योंकि इसमें भी काफी फैट होता है.
  • यदि आप अंडे का सेवन करते हैं तो इसका सिर्फ सफ़ेद भाग ही खाएं, इसके अंदर का पीला भाग नहीं खाना चाहिए.
  • हाई ट्राइग्लिसराइड बढ़ने पर आपको हर तरह के कुकिंग ऑयल का सेवन बंद कर देना चाहिए चाहे वो ऑलिव ऑयल ही क्यों न हो.
  • सभी तरह के ड्राई फ्रूट्स जिनमें ऑयल होता है उनका सेवन भी बंद करना चाहिए. जैसे बादाम, काजू, अखरोट, मूंगफली इत्यादि.
  • चीनी का सेवन भी बंद करना चाहिए क्योंकि ये हमारे शरीर में ट्राइग्लिसराइड को बढ़ा देती है. इसके बदले आप गुड़ का सेवन कर सकते हो लेकिन इसका सेवन भी सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.
  • इसके अलावा आप किसी भी प्रकार के ऑयली फ़ूड या फ़ास्ट फ़ूड का सेवन न करें और न ही मैदा युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करें.
  • फ्रूट जूस की जगह फ्रूट्स खाने की आदत डालिए क्योंकि फ्रूट्स में काफी मात्रा में फाइबर होता है.

क्या ड्राई फ्रूट्स खाने से भी ट्राइग्लिसराइड हाई होता है?

हाई ट्राइग्लिसराइड में ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं?

वैसे तो ड्राई फ्रूट्स आपके शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते है लेकिन यदि, कोई हार्ट का मरीज़ है या फिर किसी व्यक्ति का ट्राइग्लिसराइड लेवल बहुत हाई है तो ऐसे में उसे ड्राई फ्रूट्स का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, ड्राई फ्रूट्स में भी बहुत अधिक मात्रा में तेल होता है. मूंगफली में 30% से 40%  तक तेल होता है. इसी प्रकार बादाम, काजू और अखरोट में भी तेल मौजूद होता है.

ज़रा आप ख़ुद सोचकर देखिये कि, यदि कोई व्यक्ति हार्ट पेशेंट हैं या उसका ट्राइग्लिसराइड लेवल हाई है और ऐसे में वो मूंगफली का सेवन करे तो यह उसके हार्ट के लिए कितना ख़तरनाक साबित हो सकता है.

इन्फैक्ट काजू में 40% तेल, बादाम में 60% तेल और अखरोट में 64% तेल मौजूद होता है. ये सभी ड्राई फ्रूट्स हार्ट पेशेंट को बिल्कुल भी नहीं खाने चाहिए. बहुत सारे लोगों को ये गलतफहमी रहती है कि अखरोट हार्ट के लिए बहुत अच्छा होता है लेकिन ये थ्योरी हार्ट पेशेंट पर अप्लाई नहीं होती.

चाहे आप ड्राई फ्रूट्स को रात भर पानी में भिगोने के बाद खिलाओ तब भी उसमें मौजूद तेल निकलता नहीं है बल्कि अंदर ही रह जाता है. इसलिए हार्ट पेशेंट को सभी ड्राइ फ्रूट्स का सेवन करना बंद कर देना चाहिए.

ऊपर बताई गई चीज़ों का ध्यान रखा जाए तो कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को अधिक बढ़ने से रोका जा सकता है.

यदि जेनेटिक कारणों की वजह से शरीर में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लीसराइड ज्यादा है तो उसे भी समय रहते दवाई की सहायता से कम किया जा सकता है. इस प्रकार सही जानकारी और सावधानी से देश में होने वाले 80% हार्ट अटैक को रोका जा सकता है.