प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए? – Pregnancy me kya nahi khana chahiye

420
प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए – गर्भावस्था में भूलकर भी ना खाएं ये चीजें

आज हम जानेंगे कि प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के समय गर्भवती महिला को संतुलित आहार खाने की सलाह दी जाती है ता कि उसके होने वाले शिशु को उचित पोषण मिल सके और इसके साथ-साथ कई तरह के खाने से परहेज करने की भी सलाह दी जाती है.

गर्भावस्था में भूलकर भी ना खाएं ये चीजें

आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि वो कौन-कौन सी चीज़े हैं जिनके सेवन से गर्भवती महिला को बचना चाहिये.

कच्चा दूध

गर्भवती महिला के लिये दूध पीना बहुत ही फायदेमंद होता है, लेकिन यदि वह कच्चे दूध का सेवन करे तो यह फायदे की जगह नुक्सान करता है | अतः गर्भवती महिला को विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि वह अपनी गर्भावस्था के दौरान कच्चे दूध का सेवन बिलकुल भी ना करें क्यूँकि इसमें लिस्टेरिया नामक जीवाणु पाया जाता है जिससे गर्भवती महिला को संक्रमण हो सकता है और इसकी वजह से महिला को उल्टी, दस्त या बुखार की शिकायत हो सकती है | दूध को अच्छी तरह से उबालकर एवं फिर उसे गुनगुना होने के बाद ही पियें .

कच्चा पपीता

गर्भवती महिला को कच्चा या अधपका पपीता खाने से हमेंशा बचना चाहिये | क्यूँकि इसमें लेटेक्स नामक पदार्थ होता है जिसके सेवन से गर्भाशय में संकुचन पैदा होता है और गर्भपात का खतरा बना रहता है या फिर समय से पूर्व प्रसव भी हो सकता है.

अनानास

अनानास खाने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिये | शुरुआत के तीन माह तक तो इसका सेवन बिल्कुल भी ना करें, इसमें मौजूद ब्रोमेलैन नामक पदार्थ गर्भपात के लिये जिम्मेदार होता है | अंतिम के तीन माह में भी इसे ना खाएं क्यूँकि इससे प्रीमेच्योर डिलीवरी का खतरा रहता है.

चाय या कॉफ़ी

गर्भावस्था के समय डॉक्टर्स भी चाय या कॉफ़ी ना लेने की सलाह देते हैं | क्यूँकि इनमें कैफ़ीन की मात्रा अधिक होती है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को नुक्सान पहुँचता है और जन्म लेते समय उसका वजन कम रहता है.

मसालेदार भोजन

गर्भवती महिला को मसालेदार जैसे- ज्यादा नमक, मिर्च, ज्यादा तला- भूना भोजन का सेवन नहीं करना चाहिये | क्यूँकि इससे महिला को गैस व कब्ज की शिकायत हो सकती है और महिला को भोजन पचाने में भी कठिनाई होती है.

पैक्ड और फ़ास्ट फ़ूड

अक्सर महिलाओं की ये आदत होती है कि कई बार वे समय की कमी के कारण बाज़ार से पैक्ड फ़ूड ले लेती हैं या फिर स्वाद के लिये फ़ास्ट फ़ूड खा लेती हैं | पैक्ड फ़ूड में प्रिज़रवेटिव्स मिले होते हैं अतः गर्भावस्था के दौरान इस तरह के भोजन का सेवन करना गर्भवती महिला व शिशु दोनों के लिये खरनाक साबित हो सकता है, इसी तरह गर्भावस्था में फ़ास्ट फ़ूड का सेवन भी सेहत के लिये हानिकारक होता है.

फ़ास्ट फूड में अधिकतर मैदे का इस्तेमाल किया जाता है और मैदा हमारे शरीर के लिए बहुत ही विनाशकारी पदार्थ है | यह पचने में भी भारी होता है और आतों में चिपक सकता है अतः गर्भवती महिला को फ़ास्ट फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिये.

इनके अतिरिक्त गर्भवती महिला को बासी भोजन, बहुत अधिक मीठा भोजन, बहुत अधिक खट्टा, बहुत अधिक ठंडी चीज़ और स्ट्रीट फ़ूड यानि कि बाहर ठेले पर बनने वाला भोजन खाने से भी बचना चाहिये | ठेले पर बनने वाले भोजन या जूस में साफ़-सफाई का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जाता है अतः ऐसा भोजन खाने से गर्भवती महिला को फ़ूड पॉयज़निंग हो सकती है जो कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिये भी हानिकारक है.

बैंगन व कटहल

गर्भावस्था के दौरान बैंगन खाने से गर्भाशय में संकुचन पैदा होता है जिससे समय से पहले ही प्रसव हो जाता है और जन्म लेते समय शिशु बहुत कमजोर हो सकता है.

इसके साथ ही कटहल का फल या सब्जी को भी अपने भोजन में इस्तेमाल ना करें. इसकी तासीर गरम होती है जो कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरनाक है. शुरूआती दिनों में इसका अत्यधिक सेवन गर्भपात का कारण बन सकता है.

कच्ची अंकुरित दालें

अंकुरित दालें वैसे तो बहुत पौष्टिक आहार है लेकिन यदि इन्हें बिना पकाए ही खाया जाये तो ये गर्भवती महिला के लिये अच्छे नहीं माने जाते हैं | कच्ची अंकुरित दालों में साल्मोनेला नामक जीवाणु उत्त्पन्न हो जाता है जिससे महिला को उल्टी, दस्त तथा फ़ूड प्वाइज़निंग की शिकायत हो सकती है.

कच्चा या अधपका मांस

गर्भवती महिला को कच्चा या अधपका मांस या अधपकी मछली बिलकुल नहीं खानी चाहिये क्यूँकि इससे माँ व शिशु दोनों को संक्रमण हो सकता है | गर्भावस्था के समय मरकरी युक्त मछली का सेवन भी बिल्कुल ना करें, ये शिशु के मस्तिष्क पर बुरा असर डालती है.

कच्चा अंडा

गर्भावस्था के दौरान अंडे का सेवन लाभदायक माना जाता है क्यूँकि अंडे में ढेर सारे पौष्टिक तत्व होते हैं लेकिन अंडे को हमेंशा पकाकर या उबालकर ही खाएं | कच्चे अंडे में कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं | इसमें मौजूद सिल्मोनीला नामक जीवाणु से संक्रमण होने की संभावना रहती है जो माँ व शिशु दोनों के लिये खतरनाक है.

कच्ची व बिना धुलि सब्जियां

आजकल सब्जियों व फलों को पकाने के लिए तरह-तरह के कैमिकल्स, रंगों और इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता है जो कि हमारे शरीर के लिये बहुत खतरनाक होते हैं अतः गर्भवती महिलाएं जब भी कोई सब्जी या फल लेती हैं तो उसे अच्छी तरह से धोने के बाद ही पकाएं व खाएं.

शराब व धूम्रपान

शराब में एल्कोहल होता है | यदि गर्भावस्था के समय महिला शराब का सेवन करती है तो यह उसके शरीर के द्वारा शिशु तक पहुँच जाता है जिससे शिशु के दिमाग पर असर पड़ता है और उसके सोचने-समझने की छमता कमजोर हो जाती है या फिर शिशु मन्दबुद्धि भी पैदा हो सकता है | अतः इस समय गर्भवती महिला को शराब का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिये.

गर्भवती महिला धूम्रपान अथवा सिगरेट का सेवन भी ना करें | सिगरेट में निकोटीन तथा कार्बन मोनो ऑक्साइड रसायन होता है जो शिशु के दिमाग के विकास पर बुरा प्रभाव डालता है और शिशु को दिमाग संबंधी बीमारी का खतरा रहता है | धूम्रपान से भी समय से पूर्व प्रसव होने की संभावना रहती है | अतः गर्भवती महिला धूम्रपान बिल्कुल भी ना करें.

                                                                                                         

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here