प्रेगनेंसी में क्या पढ़ना चाहिए? – Pregnancy Me Kya Padhna Chahiye?

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प्रेगनेंसी में क्या पढ़ना चाहिए?

आज के इस ब्लॉग में हम आपको प्रेगनेंसी में क्या पढ़ना चाहिए (Pregnancy Me Kya Padhna Chahiye) इससे संबंधित सारी जानकारी दे रहे हैं.

गर्भ में पलने वाला शिशु जन्म से पहले ही अपनी मां को पहचानने लगता है. प्रेगनेंसी के समय आप क्या सोचते हैं, कैसे रहते हैं, खुश रहते हैं या तनाव में रहते हैं इन सब बातों का असर आपके होने वाले बच्चे पर भी पड़ता है. इसी प्रकार प्रेगनेंसी के दौरान आप जो भी पढ़ेंगे उसका असर भी आपके बच्चे पर ज़रूर पड़ेगा.

विषय - सूची

प्रेगनेंसी में क्यों पढ़ना चाहिए? – Pregnancy Me Kyon Padhna Chahiye?

प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला के हार्मोन्स में कई तरह के बदलाव होते हैं और इनकी वजह से आपका मूड़ स्विंग होना आम बात है. कभी तो आप बहुत ख़ुश रहती हैं तो कभी बहुत उदास महसूस करने लगती हैं. इसलिए अपने मूड़ को सही रखने का एक बहुत ही अच्छा तरीका है कि आप कुछ अच्छा पढ़ें जो आपके मूड़ को बेहतर बना सके और आपको सकारात्मक रख सके.

प्रेगनेंसी के दौरान आपके अध्ययन करने से शिशु के सुनने व समझने की क्षमता बढ़ती है. इसलिए आप जो कुछ भी पढ़ें उसका साफ़-साफ़ उच्चारण जोर से बोलकर करें. इससे बच्चा मां से जुड़ाव महसूस करता है और मां व बच्चे के बीच एक मजबूत भावनात्मक रिश्ता बन जाता है.

प्रेगनेंसी में क्या पढ़ना चाहिए? – Pregnancy Me Kya Padhna Chahiye?

प्रेगनेंसी में कभी-कभी गर्भवती महिला का मन बड़ा अशांत और बेचैन रहता है. कभी-कभी अजीब से खयाल आते हैं. आने वाले बच्चे के लिए मां के मन में चिंता, फ़िक्र और कभी-कभी तो डर की भावना भी उत्पन्न होने लगती है कि बच्चे का जन्म कैसे होगा, वह स्वस्थ होगा या नहीं… आदि ऐसे कई सारे सवाल आपके मन को परेशान कर सकते हैं.

शास्त्रों में कहा गया है कि अर्जुन पुत्र अभिमन्यु ने मां के गर्भ में रहते हुए ही चक्रव्यूह को भेदने की कला का ज्ञान सीख लिया था इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान अपने पढ़ने के लिए किसी अच्छी किताब का चयन करना बहुत ज़रूरी है.

यहां पर हमने कुछ किताबें बताई हैं जिन्हें आपको प्रेगनेंसी के दौरान पढ़ना चाहिए.

धार्मिक पुस्तकें

धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकें

धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकों का हमारे जीवन में ख़ास महत्त्व होता है. ये पुस्तकें हमारे जीवन को सही राह दिखाने और मुश्किल घड़ी में हमारा मार्गदर्शन करने में मददगार साबित होती हैं.

इसलिए यदि आप अपनी प्रेगनेंसी के दौरान अपने धर्म या किसी भी अन्य धर्म से जुड़ी हुई धार्मिक पुस्तक जैसे- रामायण, रामचरित मानस, सुन्दर कांड, श्रीमद भगवत गीता, कुरान, गुरुग्रंथ साहिब और बाइबिल आदि या किसी भी आध्यात्मिक पुस्तक का अध्ययन करती हैं तो इन्हें पढ़ने से आपका मन शांत रहेगा, आपके बच्चे पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा और उसमें अच्छे संस्कार आएंगे.

प्रेगनेंसी से जुड़ी किताबें

प्रेगनेंसी से जुड़ी किताबें पढ़ने से होने वाली मां के मन में जो कोई भी शंशय या शंका होती है वह दूर हो जाती है. इसके माध्यम से आप प्रेगनेंसी के सभी पड़ावों के बारे में विस्तारपूर्वक जान सकती हैं.

यदि आप पहली बार मां बनने जा रही हैं तो आपके मन में प्रेगनेंसी को लेकर ढेर सारे सवाल होते हैं जिनके जवाब देने में ये किताबें आपकी मदद करेंगी. इसलिए आपको प्रेगनेंसी से जुड़ी किताबों का ज़रूर अध्ययन करना चाहिए.

शिशु की देखभाल से सम्बंधित पुस्तक

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती माहिला ज्यादातर समय अपने होने वाले शिशु के बारे में ही सोचती रहती है इसलिए इस समय आप चाइल्ड केयर से संबंधित किताबें पढ़ें.

इससे आपकी नॉलेज भी बढ़ेगी और प्रेगनेंसी के समय मां और बच्चे को होने वाली परेशानियों के बारे में भी जानकारी मिलेगी. साथ ही आप अपने होने वाले शिशु की देखभाल के लिए पहले से ही तैयार रहेंगी कि आपको अपने नवजात शिशु की देखभाल कैसे करनी है.

मज़ेदार कॉमिक्स व कहानियां

इस दौरान अपनी मनपसंद कॉमिक्स पढ़ें इससे आप अपने बचपन के पलों को पुनः याद करके जी सकती हैं. इसके अलावा बच्चों की कुछ मज़ेदार कहानियां जैसे-पंचतंत्र की कहानियां एवं महापुरुषों की जीवनियां पढ़ें ताकि आप आगे चलकर अपने बच्चे को भी वो कहानियां सुना सकें.

समाचार पत्र एवं पत्रिका

देश व दुनिया से जुड़े रहने का एक बहुत ही अच्छा माध्यम है समाचार पत्र. रोज़ समाचार पत्र पढ़ने से आप अपडेट रहेंगी. प्रेगनेंसी में आप गर्भावस्था से जुड़ी या खानपान से जुड़ी मैगज़ीन या पत्रिकाएं भी पढ़ सकती हैं.

ब्लॉग और वेबसाइट

आजकल हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन, कम्प्यूटर, लैपटॉप की सुविधा उपलब्ध रहती है. इसलिए पढ़ने के लिए कहीं जाने की भी ज़रुरत नहीं है. गर्भवती महिला आसानी से घर पर बैठे-बैठे किसी भी अच्छी वेबसाइट या ब्लॉग पर पढ़कर ज़रूरी जानकारी हासिल कर सकती है.

ये भी पढ़ें:

प्रेगनेंसी में कौन-कौन सी किताबें पढ़ें – Pregnancy me Kaun-Kaun si Kitabein Padhein?

गर्भावस्था (Garbhavastha)

नूतन लखनपाल द्वारा लिखित इस पुस्तक में प्रेगनेंसी से जुड़े सभी पहलुओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है. यह पुस्तक हिंदी भाषा में लिखी गई है. इसमें गर्भावस्था के बाद महिला के द्वारा लिए जाने वाले आहार तथा स्तनपान व अन्य समस्याओं के बारे में भी जानकारी दी गई है. अतः आपको भी अपनी प्रेगनेंसी के समय इस पुस्तक को ज़रूर पढ़ना चाहिए.

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क्या करें जब मां बनें? (Kya Kare Jab Maa Bane)

हैइदी मर्कऑफ द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के लिए स्वादिष्ट भोजन तथा गर्भ में बच्चे के विकास के लिए सहायक आहार के बारे में पूरी जानकारी दी गई है. यह पुस्तक आपके और आपके शिशु को सेहतमंद बनाने व बीमारियों से दूर रखने में मदद करेगी.

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गर्भावस्था: भारतीय महिलाओं के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका (Garbhavastha: Bhartiya Mahilaaon Ke Liye Ek Sampoorn Margdarshika)

डॉ. विनीता साल्वी द्वारा लिखित इस पुस्तक में प्रेगनेंट महिला के सभी सवालों के जवाब देने का दावा किया गया है. इसमें बताया गया है कि महिलाएं अपने शरीर को प्रेगनेंसी के लिए कैसे तैयार करें. इस समय महिलाओं को क्या खाना चाहिए, क्या व्यायाम करना चाहिए, प्रेगनेंसी के हर माह में आपके शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं इन सबकी जानकारी इस पुस्तक में विस्तार से दी गई है.

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प्रेगनेंसी और चाइल्ड केयर (Pregnancy Aur Child Care)

डॉ. अबरार मुल्तानी द्वारा लिखित इस पुस्तक में आयुर्वेद के अनुसार प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे के विकास व मां की देखभाल के विषय में जानकारी दी गई है. साथ ही गर्भकाल में मां व बच्चे को आने वाली परेशानी व उनके समाधान के बारे में भी बताया गया है.

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आयुर्वेदिक गर्भसंस्कार (Ayurvedic Garbhsanskaar)

अभय कुलकर्णी द्वारा लिखित इस पुस्तक में यह बताया गया है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कैसा आहार लेना चाहिए और किस तरह से महिलाएं गर्भ से ही बच्चे को तीव्र बुद्धि का बना सकती हैं इस बारे में भी बताया गया है.

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फिट प्रेगनेंसी (Fit Pregnancy)

नमिता जैन द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में यह बताया गया है कि प्रेगनेंट महिला को कैसा आहार लेना चाहिए. गर्भवती महिला को अपनी डाइट में अलग-अलग तरह की सब्जियों, प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों एवं डेरी प्रोडक्ट्स को शामिल करना चाहिए.

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क्या आप मां बनने जा रही हैं? (Kya Aap Maa Banne Ja Rahi Hain?)

ऋतु श्रीवास्तव द्वारा लिखित इस पुस्तक में लेखिका ने मां बनने जा रही हर स्त्री के मन में घुमड़ रहे सवालों का समाधान देने का प्रयास किया है. इसमें गर्भावस्था से पूर्व, गर्भावस्था के दौरान एवं गर्भावस्था के बाद के विभिन्न पहलुओं की स्पष्ट जानकारी दी गई है.

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गर्भावस्था और शिशु पालन (Grbhavastha Aur Shishu Paalan)

डॉ. रचना शर्मा द्वारा लिखित यह पुस्तक गर्भकाल की जटिलताओं और शिशु पालन की समस्याओं का मार्गदर्शन कराने वाली पुस्तक है. इस पुस्तक में गर्भावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन, रोग, बचाव, सावधानियां, आहार तथा जीवनरक्षक टीकों की संपूर्ण जानकारी दी गई है.

पासपोर्ट टू हेल्दी प्रेगनेंसी (Passport to a Healthy Pregnancy)

गीता अर्जुन द्वारा लिखित इस पुस्तक में गर्भधारण से लेकर शिशु के जन्म लेने के बाद तक उसकी परवरिश कैसे करें इन सबके बारे में बहुत ही सुंदर शब्दों में बताया गया है.

प्रेगनेंसी ब्लूज़ (Pregnancy Blues)

शैला कुलकर्णी द्वारा लिखित इस पुस्तक में प्रेगनेंट महिला की कई सारी समस्याओं के बारे में बात की गई है. जैसे: प्रेगनेंसी के समय महिला के अंदर बदलाव आना, चिड़चिड़ापन आना, गुस्सा आना, डिप्रेशन होना आदि. यह पुस्तक आपको इन सभी समस्याओं से बचने के बारे में जानकारी देती है.

व्हाट टू डू व्हेन यू आर हैविंग टू (What to do When You Are Having Two)

नेटली डाइस द्वारा लिखित यह पुस्तक ख़ास तौर से उन कपल्स के लिए है जो जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाले हैं. इस पुस्तक में यह बताया गया है कि जुड़वा बच्चों की जानकारी मिलने पर आपको स्वयं को कैसे तनाव और चिंता से मुक्त रखना चाहिए. आपको इस वक़्त नेगेटिव विचारधारा या नेगेटिव सोच से ख़ुद को दूर रखना चाहिए और आने वाले ट्विन्स बेबी के लिए तैयार रहना चाहिए.

बी प्रिपयेर्ड (Be Prepared)

गैरे ग्रीनबर्ग और जेन्नी हेडेन द्वारा लिखित यह पुस्तक होने वाले पिता को ध्यान में रखकर लिखी गई है. क्योंकि लेखक का यह मानना है कि सिर्फ़ गर्भवती महिला ही नहीं बल्कि होने वाले पिता को भी अपने होने वाले बच्चे के लिए अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए. इसमें यह बताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान एक पिता को कैसे रिलैक्स रहकर अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए.

ऊपर बताई गई पुस्तकों में से कोई भी एक पुस्तक आप बाज़ार से या ऑनलाइन भी ख़रीद सकते हैं. प्रेगनेंसी के दौरान आपको यह पुस्तक ज़रूर पढ़नी चाहिए, यह भविष्य में आपके लिए ज़रूर फ़ायदेमंद साबित होंगी.

प्रेगनेंसी में क्या नहीं पढ़ना चाहिए? – Pregnancy me Kya Nahi Padhna Chahiye?

प्रेगनेंसी के दौरान आपको कोई भी ऐसी चीज़ नहीं पढ़नी चाहिए जिसका गलत असर आपके होने वाले शिशु पर पड़े. इस दौरान आप न ही कोई डरावनी किताब पढ़ें और न ही कोई ऐसी हिंसात्मक चीज़ पढ़ें जिसमें किसी हिंसात्मक घटना का जिक्र हो.

इस दौरान आपको डरावनी तथा हिंसात्मक कहानियां, फ़िल्म व धारावाहिक न तो देखने चाहिए और न ही पढ़ने चाहिए. क्योंकि इसका गलत असर आपके और आपके होने वाले शिशु पर पड़ सकता है.

प्रेगनेंसी में पढ़ने के फायदे क्या हैं? – Pregnancy me padhne ke fayde kya hain?

आइए अब जानते हैं कि प्रेगनेंसी में पढ़ने के फायदे क्या-क्या होते हैं?

शिशु का मानसिक विकास

प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी किताबें पढ़ने से होने वाली मां के ज्ञान में वृद्धि होती है और साथ ही शिशु का भी मानसिक विकास होता है. शिशु के अंदर सोचने-समझने की शक्ति भी पैदा होती है.

तनाव से मुक्ति

कहा जाता है कि किताबें हमारी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं. जीवन की मुश्किल राह में भी किताबें आपको सही दिशा दिखाती हैं. कुछ अच्छा पढ़ने से आपका मन शांत रहता है और आप तनाव मुक्त रहती हैं.

जानकारी बढ़ती है

किताबें पढ़ने से गर्भवती महिला को कई सारी बातों की जानकारी मिलती है इसलिए आपको प्रेगनेंसी में किताबें ज़रूर पढ़नी चाहिए.

मनोरंजन का साधन

प्रेगनेंसी के दौरान ख़ुद को व्यस्त रखने का सबसे अच्छा तरीका है किताबें पढ़ना. प्रेगनेंसी के दौरान जब भी आप बोर होती हैं तो घंटों टी.वी या मोबाइल फोन के सामने बिताने से बेहतर है कि आप कुछ मनोरंजक टॉपिक, किताब या कोई आर्टिकल पढ़ें. इससे आपका समय अच्छा कटेगा.

सकारात्मकता आती है

प्रेगनेंसी में अच्छी किताबें पढ़ने से गर्भवती महिला के अंदर अच्छे विचार आते हैं, नेगेटिविटी दूर होती है और पॉजिटिविटी यानि सकारात्मकता आती है. साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इस तरह महिला की पूरी गर्भावस्था कब ख़ुशी-ख़ुशी बीत जाती है पता भी नहीं चलता.

होने वाली संतान पर अच्छा प्रभाव

प्रेगनेंसी के दौरान धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करने से आपकी होने वाली संतान पर भी इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है. इसलिए घर के बड़े-बुजुर्ग भी आपको इस वक़्त धार्मिक पुस्तकें पढ़ने की सलाह देते हैं. प्रेगनेंसी में अच्छी किताबें पढ़ने से पैदा होने वाली संतान में भी अच्छे गुण आते हैं.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-जवाब

  1. क्या प्रेगनेंसी के दौरान पढ़ना सही है?

    प्रेगनेंसी के दौरांन पढ़ना आपके व आपके होने वाले शिशु के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है. यह आपके शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए भी ज़रूरी है.
    एक रिसर्च के अनुसार, आपके गर्भ में शिशु आपकी प्रेगनेंसी के आखिरी 10 सप्ताह में आपके द्वारा बोली गई या पढ़ी गई भाषा को ग्रहण करने लगता है. इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान पढ़ना बिल्कुल सही है.

  2. क्या प्रेगनेंसी में पढ़ने से होने वाला शिशु बुद्धिमान पैदा होता है?

    प्रेगनेंसी में आप जो भी पढ़ती हैं उसका असर भी आपके होने वाले शिशु पर पड़ता है. यदि आप पढ़ने के लिए अच्छी और ज्ञानवर्धक पुस्तक का चयन करती हैं तो बहुत अधिक संभावना रहती है कि आपका शिशु बुद्धिमान पैदा होगा.